आजची भावलेली कविता-आ रहा हूँ मैं

 

आजची भावलेली कविता

 आ रहा हूँ  मैं

-------------------------------------------

बंसी की धून पर  नचाने  आ रहा हूँ  मैं

मटकी में खुशियाँ भरकर आ रहा हूँ मैं


मेरे प्यारे  परम  मित्र  सुदामा  को गले

लगाने   अपने  गोकुल  आ  रहा  हूँ मैं


पिता वसुदेव  के पाँव  छूने माँ  देवकी 

के आशीर्वाद  लेने मथुरा आ रहा हूँ मैं


नँदलाल की गोदमें शरारत करनें और 

यशोदा  की  डांट  खाने  आ रहा हूँ मैं


भोले   दिल  और  साँवले  मेरे  रँग से

सबके  मन  को  मोह ने आ रहा हूँ  मैं


राधा  से करने  प्यार  मीरा को मिलने

का वादा  करने वृंदावन आ रहा हूँ  मैं 


मेरे  भक्तों के  दुख हर कर  चुटकियों 

में  सभी  को   हँसाने  आ  रहा  हूँ  मैं 


                                नीक राजपूत

                                9898693535


--------------------------------------

टिप्पण्या