आजची भावलेली कविता-आ रहा हूँ मैं
आजची भावलेली कविता
आ रहा हूँ मैं
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बंसी की धून पर नचाने आ रहा हूँ मैं
मटकी में खुशियाँ भरकर आ रहा हूँ मैं
मेरे प्यारे परम मित्र सुदामा को गले
लगाने अपने गोकुल आ रहा हूँ मैं
पिता वसुदेव के पाँव छूने माँ देवकी
के आशीर्वाद लेने मथुरा आ रहा हूँ मैं
नँदलाल की गोदमें शरारत करनें और
यशोदा की डांट खाने आ रहा हूँ मैं
भोले दिल और साँवले मेरे रँग से
सबके मन को मोह ने आ रहा हूँ मैं
राधा से करने प्यार मीरा को मिलने
का वादा करने वृंदावन आ रहा हूँ मैं
मेरे भक्तों के दुख हर कर चुटकियों
में सभी को हँसाने आ रहा हूँ मैं
नीक राजपूत
9898693535
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