काव्यपुष्प
काव्यपुष्प
श्रावण मास
चैतन्य देई मना
मुक्तता घणा
बरसणा-या
सुंदर पावसात
मनामनात
भिजण्यासाठी
सारेच आतुरले
काव्य स्फूरले
सौ उषा राऊत
-------------------------------------------
बंसी की धून पर नचाने आ रहा हूँ मैं
मटकी में खुशियाँ भरकर आ रहा हूँ मैं
मेरे प्यारे परम मित्र सुदामा को गले
लगाने अपने गोकुल आ रहा हूँ मैं
पिता वसुदेव के पाँव छूने माँ देवकी
के आशीर्वाद लेने मथुरा आ रहा हूँ मैं
नँदलाल की गोदमें शरारत करनें और
यशोदा की डांट खाने आ रहा हूँ मैं
भोले दिल और साँवले मेरे रँग से
सबके मन को मोह ने आ रहा हूँ मैं
राधा से करने प्यार मीरा को मिलने
का वादा करने वृंदावन आ रहा हूँ मैं
मेरे भक्तों के दुख हर कर चुटकियों
में सभी को हँसाने आ रहा हूँ मैं
नीक राजपूत
9898693535
--------------------------------------
उजळल्या कडा नभाच्या
पसरली लालिमा सभोवार,
सुवर्ण किरणांच्या प्रकाशात
प्रभा प्रगटली करून शृंगार.
..नखाते ज्ञानेश्वर..
.परभणी.
--------------------------------
शामलाक्षरी
~~~~
नाद सूरमयी छान
वाजवी बासरी हरी
नाद गोप गोपिकांचा
दहीहंडी नंदा घरी॥
नाद - आवाज, छंद
सौ.शामला पंडित(दीक्षित )
प्रणाली प्रकाशन, चिंचवड
----------------------------------------
प्रेमरंग उधळीत जणू
सांगे, जीवनाचे सार
अर्जुनाचा होई सखा
राधेचा तो प्रियकर..//
सौ मधुरा कर्वे.( भावगंधा )
पुणे.
----------------------------
श्रावण मास
चैतन्य देई मना
मुक्तता घणा
बरसणा-या
सुंदर पावसात
मनामनात
भिजण्यासाठी
सारेच आतुरले
काव्य स्फूरले
सौ उषा राऊत
---------------------------
मी माझे मानून त्यांच्या
सुखदुःखांना सांधत राहिले
त्यांनी मात्र शेवटी
माझ्याच घराला खिंडार पाडले.
सौ. हेमा जाधव, सातारा
--------------------------------------

टिप्पण्या
टिप्पणी पोस्ट करा